Table of Contents
कपालभाति प्राणायाम क्या है
कपालभाति प्राणायाम योग की एक महत्वपूर्ण श्वास क्रिया है, जिसमें तेजी से श्वास छोड़ने और स्वाभाविक रूप से श्वास लेने का अभ्यास किया जाता है। “कपाल” का अर्थ मस्तिष्क और “भाति” का अर्थ प्रकाश या तेज होता है। यानी यह प्राणायाम मस्तिष्क को तेज और शरीर को शुद्ध करने में मदद करता है। आज के समय में बहुत से लोग स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहते हैं, ऐसे में कपालभाति प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इस पोस्ट में आप जानिए कपलभांति प्राणायाम के फायदे।
कपालभाति प्राणायाम के फायदे
कपालभाति प्राणायाम के फायदे केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और ऊर्जात्मक स्तर पर भी दिखाई देते हैं।
• कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों को शुद्ध करता है और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।
• यह नाड़ी तंत्र को संतुलित करता है और उसे मजबूत बनाने में मदद करता है।
• कपालभाति के अभ्यास से नाड़ियां शुद्ध होती हैं, जिससे इंद्रियों की भटकन कम होने लगती है।
• यह प्राणायाम माथे के भाग में मौजूद स्नायु मार्गों को साफ करता है, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
• कपालभाति प्राणायाम मन को ऊर्जावान बनाता है और आलस्य व नींद की प्रवृत्ति को दूर करता है।
• इसके नियमित अभ्यास से पाचन अंग मजबूत होते हैं और पित्ताशय की शुद्धि में सहायता मिलती है।
• कपालभाति प्राणायाम रक्त को शुद्ध करने में सहायक है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याओं में भी लाभ देखा जाता है।
• शरीर और मन में स्थिरता आती है, जिससे ध्यान और एकाग्रता का स्तर बेहतर होता है।
इन सभी कारणों से कपालभाति प्राणायाम के फायदे योग और ध्यान के अभ्यास में विशेष माने गए हैं।
कपालभाति प्राणायाम के मानसिक फायदे
कपालभाति प्राणायाम के फायदे केवल शरीर तक सीमित नहीं हैं। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
• एकाग्रता बढ़ती है
• नकारात्मक विचार कम होते हैं
• मन शांत और स्थिर होता है
• आत्मविश्वास में वृद्धि होती है
इसलिए ध्यान और योग करने वालों के लिए यह प्राणायाम खास माना जाता है।
कपालभाति कैसे करें
कपालभाति प्राणायाम करते समय सही विधि और आराम का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है।
• सबसे पहले पद्मासन में या किसी भी आरामदायक आसन में सीधे बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
• दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें और आंखें हल्के से बंद कर लें।
• पहले हल्का सा रेचक करें, यानी सांस बाहर छोड़ें, फिर हल्का सा पूरक करें।
• अब दोनों नासिकाओं से तेज गति से सांस छोड़ना और लेना शुरू करें।
• इसमें सांस बाहर छोड़ना सक्रिय और थोड़ा जोरदार होता है, जबकि सांस लेना अपने आप स्वाभाविक रूप से होता है।
• बिना किसी जोर या थकान के जितनी देर सहज लगे, उतनी देर अभ्यास करें। शुरुआत में अधिकतम 54 श्वास-प्रश्वास तक करें।
• अभ्यास के अंत में एक लंबा और गहरा रेचक करें।
• इसके बाद जितनी देर आराम से सांस बाहर रोक सकें, उतनी देर बाहर ही रोकें (इसे बाह्य कुम्भक कहा जाता है)।
• फिर धीरे-धीरे पूरी सांस अंदर लें।
• सांस को कुछ क्षण भीतर रोककर रखें (इसे अंतर कुम्भक कहते हैं)।
• अब सांस को धीरे से बाहर छोड़ें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
• यह कपालभाति का एक चक्र माना जाता है।
• इस प्रकार ऐसे तीन चक्रों का अभ्यास करें।
कपालभाति प्राणायाम करते समय सावधानियां
कपालभाति प्राणायाम करने से पहले कुछ सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है।
• गर्भावस्था में अभ्यास न करें
• हृदय रोग या उच्च रक्तचाप में डॉक्टर की सलाह लें
• खाली पेट ही अभ्यास करें
• किसी भी प्रकार का दर्द होने पर तुरंत रोक दें
सही तरीके और नियमितता से ही कपालभाति प्राणायाम के फायदे पूरी तरह मिलते हैं।
कपालभाति प्राणायाम के फायदे इतने व्यापक हैं कि इसे योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। अगर इसे सही विधि और संयम के साथ किया जाए, तो यह शरीर, मन और ऊर्जा तीनों को संतुलित रखने में मदद करता है। रोजाना कुछ मिनट का अभ्यास आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
