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क्या यह मंत्र सिर्फ शांति के लिए है या इसके पीछे कोई बड़ा ज्ञान छिपा है?
हमने कई बार सुना है:
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते…
लेकिन अक्सर हम इसे सिर्फ एक शांति मंत्र मानकर बोल देते हैं, बिना इसका असली अर्थ समझे।
असल में यह मंत्र बहुत गहरा है और हमें जीवन, ब्रह्मांड और आत्मा के बारे में एक अद्भुत समझ देता है।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं lyrics
पूरा मंत्र इस प्रकार है:
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं का अर्थ क्या है?
अब इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
- पूर्णमदः = वह (परमात्मा) पूर्ण है
- पूर्णमिदं = यह (संसार) भी पूर्ण है
- पूर्णात् पूर्णमुदच्यते = पूर्ण से पूर्ण ही उत्पन्न होता है
- पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते = पूर्ण में से पूर्ण निकाल लो, तब भी पूर्ण ही बचता है
सरल भाषा में इसका मतलब
इस मंत्र का सीधा सा अर्थ है:
यह पूरी सृष्टि पूर्ण है और परमात्मा भी पूर्ण है।
पूर्ण से जो भी निकलता है, वह भी पूर्ण ही होता है।
और अगर पूर्ण में से कुछ निकाल भी लो, तब भी वह पूर्ण ही रहता है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए एक जलता हुआ दीपक है।
आप उससे हजारों दीपक जला सकते हैं, लेकिन मूल दीपक की रोशनी कम नहीं होती।
इसी तरह:
परमात्मा से यह संसार बना है, लेकिन परमात्मा में कोई कमी नहीं आई।
यह मंत्र हमें क्या सिखाता है?
यह मंत्र हमें एक बहुत बड़ी बात सिखाता है:
हम अधूरे नहीं हैं, बल्कि हम भी पूर्ण हैं।
लेकिन हम अपने आपको:
- शरीर से जोड़ लेते हैं
- इच्छाओं में उलझ जाते हैं
- तुलना करने लगते हैं
और फिर हमें लगता है कि हम अधूरे हैं।
जीवन में इसका क्या उपयोग है?
अगर आप इस मंत्र को समझ लें, तो जीवन बदल सकता है।
- आपको कमी का भाव कम लगेगा
- तुलना करना बंद होगा
- संतोष बढ़ेगा
- अंदर शांति आएगी
आपको लगेगा कि जो है, वह पर्याप्त है।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं का आध्यात्मिक अर्थ
आध्यात्मिक रूप से यह मंत्र बताता है कि:
- आत्मा पूर्ण है
- परमात्मा पूर्ण है
- दोनों में कोई अंतर नहीं है
जब हम इस सत्य को समझ लेते हैं, तो हमें अपने असली स्वरूप का अनुभव होने लगता है।
रोज़ इस मंत्र का जाप क्यों करें?
इस मंत्र का रोज़ जाप करने से:
- मन शांत होता है
- नकारात्मक विचार कम होते हैं
- भीतर संतुलन आता है
- आत्मविश्वास बढ़ता है
यह सिर्फ शब्द नहीं है, बल्कि एक अनुभव है।
आसान शब्दों में पूरा सार
अगर इसे एक लाइन में समझना हो, तो ऐसे समझें:
यह संसार और हम सभी पूर्ण हैं, बस हमें इसे पहचानने की जरूरत है।
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