Om Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane Namah Mantra In Hindi – Meaning and Benefits The mantra “Om Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane Namah” is a sacred and powerful chant dedicated to Lord Shri Krishna, the Supreme Soul (Paramatma). Chanting this mantra invokes divine grace, deep devotion, mental peace, and liberation from the cycle of birth and death. “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमः” मंत्र भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र मंत्र है। इस मंत्र का जप करने से भक्त को ईश्वर की कृपा, आंतरिक शांति, भक्ति की गहराई और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की प्राप्ति होती है। यह…
Author: Mahendra Kumar Vyas
The sacred mantra “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमः” is one of the most powerful invocations dedicated to Lord Krishna, the Supreme Being and protector of all creation. By chanting this mantra, devotees invite divine blessings, inner peace, spiritual wisdom, and liberation from worldly illusions. This mantra is often recited during meditation, bhakti practices, and devotional rituals to establish a deep connection with Lord Krishna’s eternal energy. The Shloka in Sanskrit & Transliteration Sanskrit:ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने नमः ॥ Transliteration:Om Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane Namah ॥ Shloka Meaning in English Om – The primordial sound, universal vibration. Krishnaya –…
“शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं” भगवान विष्णु की “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं” श्लोक भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी स्तुति में गाया जाने वाला अत्यंत पवित्र श्लोक है। इसमें उनके शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन, पद्मनाभ (नाभि से कमल उत्पन्न करने वाले), और संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनकर्ता रूप का वर्णन है। इस श्लोक का जप मानसिक शांति, भय से मुक्ति, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यह श्लोक विष्णु सहस्रनाम से लिया गया है और इसमें भगवान विष्णु के शांत, अनंत और करुणामय स्वरूप का वर्णन मिलता है। शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं श्लोक (Sanskrit Lyrics) श्लोक शान्ताकारं भुजगशयनं…
अश्विन माह में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शारदीय नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार शरद ऋतु में आश्विन मास में आयोजित किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उत्सव है। शास्त्रों में बताया गया है कि शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। वहीं इसका समापन दशमी तिथि को विजयदशमी पर्व के साथ हो जाता है। शारदीय नवरात्रि 2025…
मनुष्य केवल शरीर नहीं है, बल्कि वह आत्मा, मन और बुद्धि का संगम है। आइये जाने चेतना क्या है? चेतना ही वह शक्ति है जो इन सबको जोड़ती है और जीवन को अर्थ देती है। जब हम अपने आसपास की दुनिया को देखते, सुनते, महसूस करते या विचार करते हैं, तब यही चेतना सक्रिय होती है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से चेतना आत्मा का प्रकाश है जो शरीर को जीवित और जाग्रत रखता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चेतना को मस्तिष्क की जटिल प्रक्रियाओं और न्यूरॉन्स की क्रियाओं का परिणाम माना जाता है। लेकिन यह रहस्य आज भी विज्ञान और अध्यात्म दोनों…
भागवत पुराण | Bhagavata Purana का महत्व, कथा और इतिहास भागवत पुराण (Bhagavata Purana) को वैष्णव परंपरा में सबसे श्रेष्ठ पुराण माना गया है। इसे श्रीमद्भागवत महापुराण भी कहा जाता है। इसमें कुल 12 स्कन्ध और 18,000 श्लोक हैं, जिनमें भगवान विष्णु और विशेष रूप से श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन है। यह पुराण भक्तिमार्ग, धर्म, मोक्ष और परमात्मा के साक्षात्कार का मार्ग दिखाता है। भागवत पुराण की कथा राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद पर आधारित है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, भक्तों की कथाएँ, ध्रुव-प्रह्लाद-अजामिल चरित्र और श्रीकृष्ण जन्म से लेकर रासलीला तक की दिव्य कथाएँ आती…
In yogic philosophy, the Sushumna Nadi is considered the most important energy channel in the human subtle body. It runs along the spinal column, connecting the seven chakras and serving as the central pathway for prana (life force energy). When the Sushumna Nadi is active, energy flows freely, leading to spiritual awakening, inner balance, and the rising of Kundalini Shakti. This makes it a vital aspect of meditation, pranayama, and higher yogic practices. What is Sushumna Nadi? Sushumna Nadi is described as the central channel of energy that flows through the spinal cord, starting from the Muladhara Chakra (Root) and…
Sushumna Nadi (सुषुम्ना नाड़ी) Meaning, Importance & Activation योग शास्त्र और तंत्र ग्रंथों के अनुसार, मानव शरीर में लगभग 72,000 नाड़ियाँ होती हैं, जिनमें तीन प्रमुख हैं – इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। इनमें सुषुम्ना नाड़ी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यही नाड़ी साधक को कुंडलिनी जागरण और मोक्ष तक ले जाती है। यह नाड़ी रीढ़ की हड्डी के मध्य भाग में स्थित है और मूलाधार चक्र से शुरू होकर सहस्रार चक्र तक जाती है। जब प्राणशक्ति सुषुम्ना नाड़ी में प्रवाहित होती है, तब ध्यान सहज हो जाता है और साधक को गहन आध्यात्मिक अनुभव होते हैं। सुषुम्ना नाड़ी क्या…
Bhagavad Gita Summary in English (Geeta Ka Saar in English) The Bhagavad Gita is not just a religious scripture, but a guide to living a meaningful life. It is a divine dialogue between Lord Krishna and Arjuna on the battlefield of Kurukshetra. The Bhagavad Gita Summary (Geeta Ka Saar) teaches us how to live successfully by balancing Dharma (righteousness), Karma (duty), and Bhakti (devotion). Essence of the Gita (Geeta Ka Saar in English) Whatever happened, happened for the good. Whatever is happening is happening for the good. Whatever will happen, will also happen for the good. What have you lost,…
Gajendra Moksha in Hindi श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में वर्णित एक दिव्य कथा है। यह कथा भक्त और भगवान के प्रेम, विश्वास और समर्पण की अद्भुत गाथा है। इसमें गजेन्द्र नामक एक हाथी जब घोर संकट में फँस जाता है, तब वह पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु का स्मरण करता है और भगवान तुरंत उसकी रक्षा के लिए प्रकट होकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं। यही प्रसंग “गजेन्द्र मोक्ष” कहलाता है। गजेन्द्र मोक्ष कथा विस्तार से श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में यह अद्भुत कथा वर्णित है। बहुत समय पहले इन्द्रद्युम्न नामक राजा अत्यंत पराक्रमी और धार्मिक थे, लेकिन…