Author: Mahendra Kumar Vyas

Mahendra Vyas, born to Late Shri G. L. Vyas and Shrimati Sharda Vyas, did Civil Engineering from M.B.M.Engineering College, Jodhpur. Worked with Mars Group and Aditya Birla Group, became a part of Yoga Niketan, Mumbai in 2002, and since then practicing Yoga.

Jai Saraswati Mata Aarti Lyrics in Hindi (जय सरस्वती माता आरती) जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता, सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता । जय सरस्वती माता… चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी । जय सरस्वती माता… बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला, शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला । जय सरस्वती माता… देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया, पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया । जय सरस्वती माता… विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो, मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो । जय सरस्वती माता… धूप दीप फल मेवा, माँ…

Read More

हो दीनानाथ गीत लिरिक्स हिंदी में (Ho Dinanath Lyrics in Hindi) सोना सट कुनिया हो दीनानाथ, हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार । सोना सट कुनिया हो दीनानाथ, हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार । आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ, आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार । आजू के दिनवा हो दीनानाथ, हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर । बाट में भेटिए गेल गे अबला, एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष । अंखिया दियेते गे अबला, हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर । बाट में भेटिए गेल गे अबला, एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया । बालक…

Read More

शम्भु स्तुति – नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं – श्री राम द्वारा शिव की स्तुति  लंका प्रवेश करने के लिए प्रभु श्री राम को जब समुद्र पार करना था तब उन्होंने रामेश्वरम में स्वयं शिवलिंग की स्थापना के साथ भगवान शिव का आह्वान किया था। शम्भु स्तुति को भगवान राम द्वारा रचित कहा जाता है और इसका उल्लेख ब्रह्म पुराण से लिया गया है। (Shambhu Stuti – In sanskrit) नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं नमामि सर्वज्ञमपारभावम् । नमामि रुद्रं प्रभुमक्षयं तं नमामि शर्वं शिरसा नमामि ॥१॥ नमामि देवं परमव्ययंतं उमापतिं लोकगुरुं नमामि । नमामि दारिद्रविदारणं तं नमामि रोगापहरं नमामि ॥२॥ नमामि कल्याणमचिन्त्यरूपं…

Read More

शिव स्तुति: ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं (Shiv Stuti: Om Vande Dev Umapatin Surguru) ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् । वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम् ॥ वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम् । वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम् ॥ Shiv Stuti: Om Vande Dev Umapatin Surguru om vande dev umaapatin suragurun, vande jagatkaaranam . vande pannagbhooshanan maragdharan, vande pshoonaan patim .. vande soory shshaank vahani nayanan, vande mukundapriyam . vande bhakt janaashryan ch varadan, vande shivanshankaram ..

Read More

गणगौर व्रत कथा कहानी, मां पार्वती की आरती, गौरी तृतीया पूजा विधि गणगौर मुख्यतः राजस्थान में मनाया जाने वाला त्यौहार है, जो चैत्र माह की तीज को आता है। गणगौर का पूजन होली के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से लेकर चैत्र शुक्ल तेज तक होता है। गणगौर के पूजन में लड़कियां और नवविवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और ससुराल या पीहर की खुशी की कामना करती हैं। पूजन के साथ गणगौर की कथा (gangaur ki katha) सुनी जाती है।  गणगौर व्रत की कथा हिंदी में (Gangaur Vrat Katha in Hindi) एक बार भगवान शंकर तथा पार्वतीजी नारदजी के साथ…

Read More

होली कब और क्यों मनाई जाती है? फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का त्योहार भारत में सर्दियों के अंत का प्रतीक है और साथ ही साथ वसंत ऋतू का स्वागत करता है इस दिन भारत में लोग एक दुसरे से मिलते हैं और उ न पर रंग और गुलाल लगाते हैं| देश में अन्य त्योहारों की तरह इस त्यौहार के पीछे भी एक लोक्रपिय कथा है|आइए इस रंग बिरंगे त्यौहार के पीछे की कथा के बारे में जाने| प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्याचारी राक्षस था, जिसने तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान पा लिया कि…

Read More

मैं थाने सिमरु गजानंद भजन लिरिक्स (Main Thane Simru Gajanand Lyrics) “मैं थाने सिमरु गजानंद देवा” एक लोकप्रिय भजन है जो भगवान गणेश जी को समर्पित है। इस भजन में गणेश जी की महिमा, उनके आशीर्वाद और भक्तों के जीवन में प्रकाश लाने की शक्ति का वर्णन किया गया है। यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, आरती, और भक्ति आयोजनों में गाया जाता है। भक्त इसे प्रेम और श्रद्धा से गाते हैं ताकि गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। मैं थाने सिमरु गजानंद देवा लिरिक्स हिंदी में (Main Thane Simru Gajanand Deva Lyrics in Hindi) मैं थाने सिमरु…

Read More

कर्पूर गौरम करुणावतारं lyrics और मंत्र का अर्थ शिव यजुर मंत्र, जिसे कर्पूरगौरं करुणावतारम् मंत्र के नाम से भी जाना जाता है, सबसे प्रसिद्ध शिव मंत्रों में से एक है जो यजुर्वेद में लिखा गया है। यह भगवान शिव से संबंधित एक प्राचीन संस्कृत श्लोक है और शैव धर्म में एक लोकप्रिय आरती है। भगवान शिव लोकप्रिय हिंदू देवता हैं, जिन्हें शंकर, रुद्र, भोलेनाथ, नीलकंठ और महादेव के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें हिंदू शास्त्रों के अनुसार विध्वंसक या सृष्टि का सहांरक के रूप में भी जाना जाता है। शिव शब्द शुभ का द्योतक है भगवान शिव पाप…

Read More

माता शैलपुत्री की आरती लिरिक्स हिंदी में शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार। शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे। ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू। सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी। उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो। घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के। श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं। जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे। मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त…

Read More

हरे कृष्णा हरे कृष्णा महामंत्र का अर्थ, ध्यान विधि व उसके फायदे हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे || हरे कृष्णा हरे कृष्णा महामंत्र के फायदे हरे कृष्ण हरे राम महा मंत्र तीन संस्कृत शब्दों से बना है, जो “हरे”, “कृष्ण” और “राम” हैं। शास्त्रों के अनुसार “जो इस मंत्र का निरंतर जाप करते हैं, उनके जीवन में कभी भी विघ्न या  बाधा नहीं आ सकती है। इस मंत्र का जाप करने से मानसिक  शांति मिलती है और हर कार्य में संतुष्टि मिलती है। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा…

Read More