हिंदू धर्म में शीतला माता को स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता शीतला अपने भक्तों को रोगों से बचाती हैं और परिवार में सुख-शांति बनाए रखती हैं। भारत के कई राज्यों में शीतला माता की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
शीतला माता की पूजा के सबसे महत्वपूर्ण दिन शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी माने जाते हैं। इन दिनों श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से माता की पूजा करते हैं और उनसे परिवार की सुरक्षा और स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
Table of Contents
शीतला माता कौन हैं
शीतला माता को माता दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला अपने हाथ में झाड़ू, कलश और नीम के पत्ते धारण करती हैं। उनका वाहन गधा माना जाता है।
पुराने समय में जब चेचक और अन्य संक्रामक रोग फैलते थे, तब लोग माता शीतला की पूजा करके उनसे रक्षा की प्रार्थना करते थे। इसलिए उन्हें रोगों को दूर करने वाली देवी भी कहा जाता है।
शीतला सप्तमी कब है 2026
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि शीतला सप्तमी कब है 2026। पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी होली के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है।
साल 2026 में शीतला सप्तमी मार्च महीने में पड़ने की संभावना है। इस दिन भक्त माता की पूजा करते हैं और परिवार के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हैं।
- शीतला सप्तमी – 10 मार्च 2026, मंगलवार
- शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त – 06:04 AM से 05:56 PM
- सप्तमी तिथि प्रारम्भ – 09 मार्च 2026 को 11:27 PM बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त – 11 मार्च 2026 को 01:54 AM बजे
शीतला अष्टमी 2026
शीतला अष्टमी का त्योहार सप्तमी के अगले दिन मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे बसौड़ा या बसोड़ा भी कहा जाता है।
शीतला अष्टमी 2026 में भी होली के बाद मनाई जाएगी। इस दिन घरों में एक दिन पहले भोजन बनाकर रखा जाता है और अगले दिन वही ठंडा भोजन माता को भोग लगाकर ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और घर में रोगों का प्रवेश नहीं होता।
पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी (बसोड़ा पूजा) का व्रत इस साल 11 मार्च 2026 को रखा जाएगा। जिस चैत्र मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत पड़ता है, वह इस साल 11 मार्च 2026 को पूर्वाह्न 01:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 12 फरवरी 2026 को भोर के समय 04:19 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन देवी शीतला की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त प्रात:काल 06:36 बजे से लेकर सायंकाल 06:27 बजे तक रहेगा।
शीतला माता की पूजा विधि
शीतला माता की पूजा बहुत सरल मानी जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और मंदिर या घर में माता की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा की जाती है।
पूजा में नीम के पत्ते, हल्दी, रोली, फूल और ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है। माता से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
कई स्थानों पर लोग शीतला माता के मंदिर जाकर भी दर्शन करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं।
शीतला माता की पूजा का महत्व
शीतला माता की पूजा का मुख्य उद्देश्य परिवार को रोगों से सुरक्षित रखना माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु सच्चे मन से माता की पूजा करता है, उसके घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार स्वस्थ रहता है।
इसी कारण भारत के कई हिस्सों में हर साल शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का पर्व बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।
निष्कर्ष
शीतला माता हिंदू धर्म में स्वास्थ्य और सुरक्षा की देवी मानी जाती हैं। शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
अगर आप भी अपने परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं, तो शीतला माता की पूजा अवश्य करें और इस पवित्र परंपरा को आगे बढ़ाएं।
यह भी पढ़ें –
सरस्वती स्तुति मंत्र – ज्ञान, बुद्धि और वाणी की कृपा पाने का सम्पूर्ण पाठ
विष्णु मंत्र स्तुति – जीवन में शांति, संरक्षण और संतुलन का दिव्य मार्ग
