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श्री यंत्र क्या है और इसका महत्व
श्री यंत्र को सनातन परंपरा में सबसे शक्तिशाली यंत्रों में गिना जाता है। इसे देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जहां श्री यंत्र की सही तरीके से स्थापना होती है, वहां धन, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। श्री यंत्र की बनावट बहुत विशेष होती है। इसमें कई त्रिकोण, वृत्त और कमल दल होते हैं, जो ब्रह्मांड की ऊर्जा को दर्शाते हैं। यही कारण है कि इसे ध्यान और साधना के लिए भी बेहद उपयोगी माना गया है।
श्री यंत्र के फायदे जो जीवन को बदल सकते हैं
श्री यंत्र के फायदे केवल धन तक सीमित नहीं हैं। इसके नियमित पूजन और ध्यान से व्यक्ति के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखे जाते हैं।
- आर्थिक स्थिति में सुधार होता है
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है
- नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है
- घर में सुख-समृद्धि और संतुलन बना रहता है
- कार्यों में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे कम होती हैं
इसी वजह से बहुत से लोग अपने घर या ऑफिस में श्री यंत्र स्थापित करते हैं।
श्री यंत्र के प्रकार
श्री यंत्र के प्रमुख प्रकार (बनावट के आधार पर)
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- मेरु श्री यंत्र (Meru Shree Yantra): यह त्रि-आयामी पिरामिडनुमा होता है और इसे ब्रह्मांडीय शक्ति का केंद्र माना जाता है। इसमें कई कोण और परतें होती हैं, जो देवताओं से युक्त होती हैं।
- भूपृष्ठ श्री यंत्र (Bhuprishta Shree Yantra): यह एक समतल (फ्लैट) आकृति में होता है और इसे ज़मीन पर रखा जाता है, जिसका पिछला भाग ज़मीन को छूता है। यह कई मंत्रों से अंकित होता है।
- कुर्म पृष्ठ श्री यंत्र (Kurma Prishta Shree Yantra): यह कछुए (कुर्म) के आकार पर आधारित होता है।
श्री यंत्र के प्रकार (धातु/सामग्री के आधार पर)
- स्फटिक श्री यंत्र (Crystal Shree Yantra): यह क्रिस्टल (स्फटिक) से बना होता है और मानसिक स्पष्टता व सकारात्मकता के लिए होता है।
- पंचधातु श्री यंत्र (Panchdhatu Shree Yantra): पांच धातुओं (सोना, चांदी, पारा छोड़कर) से बना, यह अत्यधिक शक्तिशाली और शुभ फलदायी माना जाता है।
- सोना/चांदी श्री यंत्र (Gold/Silver Shree Yantra): सोने या चांदी जैसी महंगी धातुओं से निर्मित, जो आर्थिक सफलता और आध्यात्मिक विकास के लिए होते हैं।
- पारद श्री यंत्र (Parad Shree Yantra): पारे (मरकरी) से बना यंत्र, जो विशेष शक्तियों और लाभों के लिए जाना जाता है।
- हकीक श्री यंत्र (Hakik Shree Yantra): हकीक (Agate) पत्थर से बना श्री यंत्र भी प्रचलित है।
- श्रीपरणी यंत्र: यह श्रीपरणी वृक्ष की लकड़ी से बनता है।
- रत्न जड़ित यंत्र: हीरे, मोती, माणिक आदि रत्नों से बना या अंकित यंत्र भी होता है।
श्री यंत्र बीज मंत्र और जाप विधि
श्री यंत्र के साथ मंत्र जाप करने से उसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। सबसे प्रचलित श्री यंत्र बीज मंत्र इस प्रकार है:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः
इस मंत्र का जाप शांत मन से 108 बार किया जाता है। सुबह के समय मंत्र जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है।
श्री यंत्र को कहां रखना चाहिए
श्री यंत्र को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में, घर के मंदिर या तिजोरी के पास एक लाल कपड़े पर रखना शुभ माना जाता है, ताकि आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। यह स्थान सकारात्मक ऊर्जा और धन-समृद्धि के लिए उत्तम है और इसे स्वच्छ रखना चाहिए, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
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