हरि तुम हरो हिंदी भजन लिरिक्स
हरि तुम हरो जन की पीर॥
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥
भक्त कारण रूप नर हरि, धरियो आप शरीर॥
हिरण्याकुस को मारि लीन्हो धरियो नहीं धीर॥
बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर दुख जहाँ तहां पीर॥
हरि तुम हरो जन की पीर॥
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥
भक्त कारण रूप नर हरि, धरियो आप शरीर॥
हिरण्याकुस को मारि लीन्हो धरियो नहीं धीर॥
बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर दुख जहाँ तहां पीर॥