मां बगलामुखी का मंत्र, इसका अर्थ और कथा बगलामुखी मन्त्र शत्रुओं को परास्त करने और उन पर विजयी पाने का सबसे बड़ा अस्त्र है। यह विरोधियों, बुरी नजर, काला जादू, वित्तीय असुरक्षा, कानूनी कठिनाइयों, पुरानी समस्याओं और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करता है। अपने विरोधियों को वश में करने और उन्हें हराने के लिए साधना करें मां देवी बगलामुखी के मंत्र की। मां बगलामुखी का मंत्र और अर्थ (Maa Baglamukhi Mantra) || ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा || अर्थ – हे देवी, सभी नकारात्मक लोगों के कदमों को रोक दें, उनकी…
Author: Mahendra Kumar Vyas
ऋणमोचक मंगल स्त्रोत का महत्व ऋणमोचक मंगल स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित का पाठ करने से व्यक्ति को आर्थिक संकटों से मुक्ति और कर्ज़ से छुटकारा मिलता है। विशेषकर मंगलवार के दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से मंगल ग्रह के दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह स्तोत्र पढ़ा जाए तो भगवान मंगलदेव ऋणी व्यक्ति को उधार और कर्ज़ से मुक्त कर देते हैं। साथ ही धन, ऐश्वर्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। ऋणमोचक मंगल स्त्रोत कैसे करें पाठ मंगलवार को लाल वस्त्र पहनकर लाल आसन पर बैठें।…
अक्षय तृतीया 2023 तिथि, इसका महत्व एवं इसकी कथा अक्षय तृतीया, जिसे अखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर में सबसे शुभ दिनों में से एक है। यह दिन वैशाख के हिंदू महीने में शुक्ल पक्ष के तीसरी तिथि (चंद्र दिवस) पर पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शुरू किया गया कोई भी नया काम सुख, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आता है। अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं। अक्षय तृत्य के दिन से कई युगों का आरंभ हुआ है…
स्वस्ति वाचन मंत्र (Swasti Vachan Mantra) वैदिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण मंत्र है। किसी भी पूजा, गृह प्रवेश, विवाह या हवन की शुरुआत में इसका पाठ किया जाता है। यह मंत्र शांति, समृद्धि और मंगल की कामना से जुड़ा है। संस्कृत शास्त्रों में इसे अत्यंत फलदायक माना गया है और कहा गया है कि स्वस्ति वाचन का जाप करने से वातावरण पवित्र हो जाता है तथा क्रोध और वैमनस्य समाप्त हो जाते हैं। स्वस्ति वाचन मंत्र (Swasti Vachan Mantra) ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥…
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है लिरिक्स हिंदी में | Govind Mero Hai Gopal Mero Hai Lyrics in Hindi “गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है” एक सुंदर और मधुर भजन है जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस भजन में भक्त अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण (गोविंद, गोपाल, बांके बिहारी, नंदलाल) के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति व्यक्त करता है। यह भजन वृंदावन और कृष्ण भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसकी पंक्तियाँ गाकर भक्त भगवान के प्रति अपनी आस्था और समर्पण प्रकट करते हैं। Govind Mero Hai Gopal Mero Hai Lyrics in Hindi गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है, श्री बांके…
मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे भजन के लिरिक्स हिंदी में मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे, मोरी नाजुक कलाइयां मरोड़ गयो रे, हो मोरी नाजुक कलाइयां मरोड़ गयो रे । मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे… कंकरी मोहे म्हारी गगरिया फोर डारी, हाय गगरिया फोर डारी, हो कंकरी मोहे म्हारी गगरिया फोर डारी, मोरी साड़ी अनारी भिगोय गयो रे । मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे… नैनों से जादू किया जियरा मोह लिया, हाय जियरा मोह लिया, मोरा घुंघटा नजरियों से तोड़ गयो रे । मोहे पनघट अजी हाँ, मोहे पनघट हाँ, मोहे पनघट पे…
Jai Saraswati Mata Aarti Lyrics in Hindi (जय सरस्वती माता आरती) जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता, सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता । जय सरस्वती माता… चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी । जय सरस्वती माता… बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला, शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला । जय सरस्वती माता… देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया, पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया । जय सरस्वती माता… विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो, मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो । जय सरस्वती माता… धूप दीप फल मेवा, माँ…
हो दीनानाथ गीत लिरिक्स हिंदी में (Ho Dinanath Lyrics in Hindi) सोना सट कुनिया हो दीनानाथ, हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार । सोना सट कुनिया हो दीनानाथ, हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार । आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ, आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार । आजू के दिनवा हो दीनानाथ, हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर । बाट में भेटिए गेल गे अबला, एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष । अंखिया दियेते गे अबला, हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर । बाट में भेटिए गेल गे अबला, एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया । बालक…
शम्भु स्तुति – नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं – श्री राम द्वारा शिव की स्तुति लंका प्रवेश करने के लिए प्रभु श्री राम को जब समुद्र पार करना था तब उन्होंने रामेश्वरम में स्वयं शिवलिंग की स्थापना के साथ भगवान शिव का आह्वान किया था। शम्भु स्तुति को भगवान राम द्वारा रचित कहा जाता है और इसका उल्लेख ब्रह्म पुराण से लिया गया है। (Shambhu Stuti – In sanskrit) नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं नमामि सर्वज्ञमपारभावम् । नमामि रुद्रं प्रभुमक्षयं तं नमामि शर्वं शिरसा नमामि ॥१॥ नमामि देवं परमव्ययंतं उमापतिं लोकगुरुं नमामि । नमामि दारिद्रविदारणं तं नमामि रोगापहरं नमामि ॥२॥ नमामि कल्याणमचिन्त्यरूपं…
शिव स्तुति: ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं (Shiv Stuti: Om Vande Dev Umapatin Surguru) ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् । वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम् ॥ वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम् । वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम् ॥ Shiv Stuti: Om Vande Dev Umapatin Surguru om vande dev umaapatin suragurun, vande jagatkaaranam . vande pannagbhooshanan maragdharan, vande pshoonaan patim .. vande soory shshaank vahani nayanan, vande mukundapriyam . vande bhakt janaashryan ch varadan, vande shivanshankaram ..