जब भी पढ़ाई में मन न लगे, बुद्धि भ्रमित हो जाए या जीवन में स्पष्टता की कमी महसूस हो, तब सरस्वती स्तुति मंत्र का जप मन को स्थिर और बुद्धि को तेज बनाता है। माँ सरस्वती को ज्ञान, कला, संगीत और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। यहाँ मैं अपने घर में किए जाने वाले नियमित पाठ के अनुसार सम्पूर्ण और क्रमबद्ध सरस्वती स्तुति मंत्र साझा कर रहा हूँ, जिसे आप भी नित्य जप में शामिल कर सकते हैं।
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सम्पूर्ण सरस्वती स्तुति मंत्र (क्रमबद्ध पाठ)
१)
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
या शुभ्रवस्त्रावृता ।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना ॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिः
देवैः सदा वन्दिता ।
सा मां पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्यापहा ॥
२)
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
३)
सरस्वति नमस्तुभ्यं
वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि
सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
यह सम्पूर्ण स्तुति देवी सरस्वती की आराधना के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
सरस्वती स्तुति मंत्र का सरल अर्थ
पहले श्लोक में माँ के श्वेत, निर्मल और ज्ञानस्वरूप रूप का वर्णन है। वे अज्ञान और जड़ता को दूर करती हैं।
दूसरे श्लोक में उन्हें ब्रह्मज्ञान का सार, वीणा और पुस्तक धारण करने वाली तथा बुद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में प्रणाम किया गया है।
तीसरा मंत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों द्वारा पढ़ाई शुरू करने से पहले बोला जाता है, ताकि कार्य में सफलता मिले।
सरस्वती स्तुति मंत्र जप की विधि
- प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठें
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें
- माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएँ
- कम से कम 11 या 21 बार सरस्वती स्तुति मंत्र का जप करें
- अंत में हाथ जोड़कर सफलता और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें
बस नियमितता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।
सरस्वती स्तुति मंत्र के लाभ
- स्मरण शक्ति में वृद्धि
- वाणी में मधुरता
- पढ़ाई में एकाग्रता
- कला और संगीत में प्रगति
- आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
विद्यार्थियों, कलाकारों और वक्ताओं के लिए यह स्तुति विशेष लाभकारी मानी जाती है।
सरस्वती स्तुति मंत्र केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि मन और बुद्धि को प्रकाशित करने वाली साधना है। यदि आप प्रतिदिन कुछ मिनट भी श्रद्धा से इसका जप करें, तो धीरे-धीरे भीतर स्पष्टता, शांति और आत्मबल का अनुभव होने लगता है। आप चाहें तो इस सरस्वती स्तुति मंत्र को अपने बच्चों को भी सिखा सकते हैं, ताकि उनके जीवन में ज्ञान और सफलता का मार्ग सदा खुला रहे।
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