माँ दुर्गा स्तुति मंत्र केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक शक्ति हैं जो मन को स्थिर, हृदय को शांत और जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती हैं। जब भी मन में भय, तनाव या असुरक्षा का भाव आता है, तब माँ दुर्गा का स्मरण अद्भुत साहस देता है।
इस लेख में मैं माँ दुर्गा स्तुति मंत्र के कुछ प्रसिद्ध मंत्र, उनका अर्थ और जप करने की सरल विधि साझा कर रहा/रही हूँ, जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
Table of Contents
माँ दुर्गा स्तुति मंत्र: प्रमुख और शक्तिशाली मंत्र
1. सर्वमंगल मांगल्ये मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ:
हे माँ! आप सभी मंगलों की दाता, कल्याणमयी, सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली और शरण देने वाली हैं। आपको मेरा प्रणाम।
यह माँ दुर्गा स्तुति मंत्र अत्यंत लोकप्रिय है और नवरात्रि, शुक्रवार या किसी भी शुभ कार्य से पहले जपा जाता है।
2. या देवी सर्वभूतेषु मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आप “बुद्धि-रूपेण”, “मातृ-रूपेण”, “लक्ष्मी-रूपेण” आदि शब्दों का भी प्रयोग कर सकते हैं।
अर्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।
यह मंत्र हमें यह अनुभव कराता है कि देवी केवल मंदिर में नहीं, बल्कि हर जीव में विद्यमान हैं।
3. दुर्गा गायत्री मंत्र
ॐ कात्यायनाय विद्महे
कन्याकुमारि धीमहि।
तन्नो दुर्गि प्रचोदयात्॥
अर्थ:
हम कात्यायनी देवी का ध्यान करते हैं, वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
यह मंत्र मानसिक स्पष्टता, निर्णय शक्ति और सकारात्मक सोच के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
4. बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
यह दुर्गा स्तुति मंत्र अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है। इसे श्रद्धा और शुद्ध भावना के साथ जपना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और आंतरिक शक्ति जाग्रत करने में सहायक माना जाता है।
माँ दुर्गा स्तुति मंत्र जपने की सरल विधि
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सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठें।
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पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें।
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माँ दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
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कम से कम 11, 21 या 108 बार मंत्र का जप करें।
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अंत में माँ से अपनी मनोकामना कहें और कृतज्ञता व्यक्त करें।
नियमित रूप से माँ दुर्गा स्तुति मंत्र का जप करने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है, भय दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनता है।
नवरात्रि में माँ दुर्गा स्तुति मंत्र का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा स्तुति मंत्र का विशेष महत्व होता है। इन दिनों किया गया जप कई गुना फलदायी माना जाता है। यदि संभव हो तो प्रतिदिन अलग रूप की पूजा के साथ मंत्र जप करें।
निष्कर्ष
माँ दुर्गा स्तुति मंत्र केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति का स्रोत हैं। जब हम श्रद्धा और विश्वास के साथ इन मंत्रों का जप करते हैं, तो जीवन की कठिनाइयाँ भी सरल लगने लगती हैं।
आप चाहें तो इन मंत्रों को अपने दैनिक ध्यान, योग या संध्या आरती में शामिल कर सकते हैं। धीरे-धीरे आप स्वयं महसूस करेंगे कि आपके भीतर शांति, साहस और स्थिरता बढ़ रही है।
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