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Shiva Panchakshara Stotram – शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्

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शिव पंचाक्षर स्त्रोतम – Shiva Panchakshara Stotram Mp3 Download

The Shiva panchakshara stotra written below has been composed by Sri Adi Shankaracharya. It is based on the moolamantra of Lord Shiva “ Om Namashivaya”. Shiva Panchakshara Stotra is a prayer to Lord Shiva. Each stanza of this Stotra starts with one of the five syllables, na, ma, shi, va, and ya.

शिव पंचाक्षर स्त्रोतम में शिव जी की प्रार्थना की गई है। ॐ नम: शिवाय पर निर्धारित यह श्लोक संग्रह अत्यंत मनमोहक रूप से शिवस्तुति कर रहा है। इस स्तोत्र के रचयिता श्री आदि शंकराचार्य जी हैं जो महान शिव भक्त, अद्वैतवादी, एवं सनातनी ग्रंथ एवं विद्वानों के अनुसार वे स्वयं भगवान शिव के अवतार थे। इस स्तोत्र का प्रत्येक छंद न, म, शि, व, य – इन पांच अक्षरों से प्रारम्भ होता है।

 Shiv Panchakshara Strotam By Ramesh Bhai Ojha Mp3 Download

Shiv Panchakshara Strotam Path in Hindi

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय।।1।।

जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न वे शिव नित्य–अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य करती हैं, अर्थात् वस्त्र आदि उपाधि से भी जो रहित हैं; ऐसे निरवच्छिन्न उस नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

 मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय, नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय, तस्मै मकाराय नम: शिवाय।।2।। 

जो शिव आकाशगामिनी मन्दाकिनी के पवित्र जल से संयुक्त तथा चन्दन से सुशोभित हैं, और नन्दीश्वर तथा प्रमथनाथ आदि गण विशेषों एवं षट् सम्पत्तियों से ऐश्वर्यशाली हैं, जो मन्दार–पारिजात आदि अनेक पवित्र पुष्पों द्वारा पूजित हैं; ऐसे उस मकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय, तस्मै शिकाराय नम: शिवाय।।3।।

जो शिव स्वयं कल्याण स्वरूप हैं, और जो पार्वती के मुख कमलों को विकसित करने के लिए सूर्य हैं, जो दक्ष–प्रजापति के यज्ञ को नष्ट करने वाले हैं, नील वर्ण का जिनका कण्ठ है, और जो वृषभ अर्थात् धर्म की पताका वाले हैं; ऐसे उस शिकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

 वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय, तस्मै वकाराय नम: शिवाय।।4।।

 वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम आदि श्रेष्ठ मुनीन्द्र वृन्दों से तथा देवताओं से जिनका मस्तक हमेशा पूजित है, और जो चन्द्र–सूर्य व अग्नि रूप तीन नेत्रों वाले हैं; ऐसे उस वकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।।

 यक्षस्वरूपाय जटाधराय, पिनाकहस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय, तस्मै यकाराय नम: शिवाय।।5।।

जो शिव यक्ष के रूप को धारण करते हैं और लंबी–लंबी खूबसूरत जिनकी जटायें हैं, जिनके हाथ में ‘पिनाक’ धनुष है, जो सत् स्वरूप हैं अर्थात् सनातन हैं, दिव्यगुणसम्पन्न उज्जवलस्वरूप होते हुए भी जो दिगम्बर हैं; ऐसे उस यकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते

जो भक्त भगवान् शंकर के सन्निकट इस पवित्र पञ्चाक्षर स्तोत्र का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करके भगवान् शंकर के साथ आनन्द प्राप्त करता है

Shiv Panchakshara Strotam Path in English

Nagendraharaya Trilochanaya

Bhasmangaragaya Maheshvaraya

Nityaya Shuddhaya Digambaraya

Tasmai Nakaraya Namah Shivaya ।।1।।

Salutations to Lord Shiva, who wears the king of snakes as a garland, the three-eyed god, whose body is smeared with ashes, the great lord, the eternal and pure one, who wears the directions as his garment, and who is represented by the syllable “na ”

Mandakini salila chandana charchitaya

Nandishvara pramathanatha Maheshvaraya

Mandarapushpa bahupushhpa supujitaya

Tasmai Makaraya Namah Shivaya ।।2।।

I bow to Lord Shiva, who has been worshipped with water from the Ganga (Mandakini) and anointed with sandalwood paste, the lord of Nandi, the lord of the host of goblins and ghosts, the great lord, who is worshiped with Mandara and many other kinds of flowers, and who is represented by the syllable “ma. ”

Shivaya Gauri Vadanabjavrunda

Suryaya Dakshadhvara Nashakaya

Shrinilakanthaya Vrushhadhvajaya

Tasmai Shikaraya Namah Shivaya ।।3।।

Salutations to Lord Shiva, who is all-auspiciousness, who is the sun that causes the lotus face of Gauri (Parvati) to blossom, who is the destroyer of the yajna of Daksha, whose throat is blue (Nilakantha), whose flag bears the emblem of the bull, and who is represented by the syllable “shi. ”

Vasishhtha Kumbhodbhava Gautamarya

Munindra Devarchita Shekharaya .

Chandrarkavaishvanara Lochanaya

Tasmai Vakaraya Namah Shivaya ।।4।।

Vasishhtha, Agastya, Gautama, and other venerable sages, and Indra and other gods have worshipped the head of Lord Shiva. I bow to that Shiva whose three eyes are the moon, sun, and fire, and who is represented by the syllable “va. ”

Yakshasvarupaya Jatadharaya

Pinakahastaya Sanatanaya

Divyaya Devaya Digambaraya

Tasmai Yakaraya Namah Shivaya ।।5।।

Salutations to Shiva, who bears the form of a Yaksha, who has matted hair on his head, who bears the Pinaka bow in his hand, the primeval Lord, the brilliant god, who is Digambara, and who is represented by the syllable “ya”.

Panchaksharamidam Punyam Yah Pathechchhivasannidhau.

Shivalokamavapnoti Shivena Saha Modate.

Anyone who recites this sacred five-syllable mantra near the Shiva Linga, he attains the abode of Shiva and rejoices there with Shiva.

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About the author

Mahendra Kumar Vyas

Mahendra Vyas, with parental home at Jodhpur and born to Late Shri Goverdhan Lal Vyas and Shrimati Sharda Vyas, did Civil Engineering from M.B.M.Engineering College, Jodhpur. Shifted to Mumbai after completing engineering and worked with Sanjay Narang's Mars Group and Aditya Birla Group. With an inclination to spirituality and service, joined the Yoga stream and became a part of Yoga Niketan, Goregaon (west) in 2002 and since then practicing and imparting Yoga knowledge at Yoga Niketan and different corporates.

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